जब कभी अपनी यादों को कुरेदते हैं
कुछ पुराने पन्ने हमेशा खुल जाते हैं
वही चेहरे वही बातें वही राज़ उभर आतें हैं
बंद करना चाहते हैं यादों की उस किताब को
पर उसका अंत ही नहीं ढूंढ पातें हैं !
इतना कुछ पीछे छोड़ आयें हैं फिर भी आगे नहीं बढ़ पातें हैं
हर ख़ुशी में कुछ कमी हैं हर दर्द में तेरी ही बातें हैं .
चार कदम भी साथ ना चल पाए ऐसी भी क्या मज़बूरी थी
आज सोचतें हैं क्या कभी साथ भी थे हम या हमेशा इतनी दूरी थी !
ढल गयी जिंदगी की शाम अब रात हो चली है
लेकिन हर रात, आज तक, तेरी कमी खली है .
तेरे दिल तक मेरे दिल की आवाज़ अगर कभी पहुँच जाएगी
मेरी यादों की किताब का शायद वो अंत ढूंढ पाएगी ,
लगता है अब ना कोई मिलन ना और जुदाई हो पाएगी,
मेरे और तेरे मिटने के बाद उन पन्नो पर लिखी हुयी स्याही मिट जाएगी !
कुछ पुराने पन्ने हमेशा खुल जाते हैं
वही चेहरे वही बातें वही राज़ उभर आतें हैं
बंद करना चाहते हैं यादों की उस किताब को
पर उसका अंत ही नहीं ढूंढ पातें हैं !
इतना कुछ पीछे छोड़ आयें हैं फिर भी आगे नहीं बढ़ पातें हैं
हर ख़ुशी में कुछ कमी हैं हर दर्द में तेरी ही बातें हैं .
चार कदम भी साथ ना चल पाए ऐसी भी क्या मज़बूरी थी
आज सोचतें हैं क्या कभी साथ भी थे हम या हमेशा इतनी दूरी थी !
ढल गयी जिंदगी की शाम अब रात हो चली है
लेकिन हर रात, आज तक, तेरी कमी खली है .
तेरे दिल तक मेरे दिल की आवाज़ अगर कभी पहुँच जाएगी
मेरी यादों की किताब का शायद वो अंत ढूंढ पाएगी ,
लगता है अब ना कोई मिलन ना और जुदाई हो पाएगी,
मेरे और तेरे मिटने के बाद उन पन्नो पर लिखी हुयी स्याही मिट जाएगी !